प्रवीण चन्द्र शर्मा की पाँच कविताएं

      मेरी भूमिका पूर्व निर्धारित है मेरी भूमिका लिख कर रखे हुए हैं मेरे संवाद मुझे केवल इन्हें याद रखना है और इस तरह अदा करना है कि सुनने …

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भूरी झाड़ियां/ पच्चीस छोटी कविताएं – रंजना अरगडे

  सूखी झाड़ियों पर फुर्ररऱ से उड़तीं भूरी चिड़ियाँ गोया सूखी झाड़ियाँ ही हों भूरी चिड़ियाँ  2 क्या रस पाती होंगी भूरी झाड़ियों पर नीली चमकती फूलचुहिया? या ढूँढतीं हैं …

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कविता का अनुवाद : सांस्कृतिक साझेदारी का सार्थक सोपान – रेखा सेठी

 कविता को अपने जीवन में बहुत करीब महसूस करते हुए भी मैंने कभी कवितायें नहीं लिखीं। संभवतः ये अनुवाद उस खाली कोने को भरने की कोशिश भर हैं। अपने इस …

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